14.10.09

lucki Ram part 8

     [हॉस्पिटल में ICCU का द्वार खुलता है ऑर डॉक्टर बाहर निकलता है ]
मीरा       =क्या पोसिशन है डोक्टर ?
डॉक्टर ==  सॉरी [वो इंकार में गर्दन हिलाता है ]नो इम्प्रूवमेंट !नो मूवमेंट ! बॉडी  अभी भी कोमा  में है /कोई हरकत नहीं ऑर ऑंखें ...[फिर डॉक्टर अफ़सोस भरी मुद्रा में गर्दन हिलाता निकल जाता है  \मीरा दोनों हाथों में चेहरा छिपा कर फफक उठती है ]
दिव्या      = ओ मेरी भाभी !ओ ओ [लक्ष्मन कि बहन दिव्या आकर उसे तस्सली देती है ]रोना नहीं \सब ठीक हो जायेगा \
      [मीरा उसकी बाहों में फफक उठती है जबकि दिव्या रहस्यमयी  आँखों से सोचती है ...
दिव्या      = लक्की भैया!आप तो अब ऊपर ही जाओ \बिन आँखों के वैसे भी क्या करेंगे जीकर \मीरा की भी जिंदगी ख़राब करेंगे\सोचो--आप अगर मर जाते हैं तो कितने लोग लक्की हो जायेंगे \मुझे माँ वाला मकान मिल जायेगा -माँ के बद्पूरी प्रोपर्टी मेरी हो जायेगी \मीरा को भी -कोई नया मोहन मिल जायेगा
            चीं००[तभी मुख्या द्वार खुलता है ऑर माँ भीतर कदम रखती है \राम किसी कोम दिखाई नहीं पड़ते \]
मम्मी     = लक्की !लक्की देख कोन आया है !भगवान् राम आये हैं बेटा !
दिव्या     =[बुडिया पगला गई हैं ]मन ही मन बुद बुदाती दिव्या माँ को बोलती है ==कहाँ गई थी आप ?५ दिन से आपकी कोई खबर नहीं -पता नहीं कहाँ घूमती रहती हैं आप ?
मम्मी === आओ राम !बेटा आओ [उसके शब्द नजर अंदाज करती मम्मी आई सी सी कक्ष की तरफ बड़ती है जबकि राम दिव्या के बीच में से निकलते हैं [
दिव्या    == हैं ००० मुझे ऐसा क्यों लगा कि मेरे भीतर कुछ हलचल हुई है \हट ००वहम है तेरा
          चीं ०० [मम्मी ऑर राम भीतर प्रविष्ट होते हैं ]
          [अंदर आई सी सी यू बेड पर लक्ष्मन मृतप्राय पड़ा है कंप्यूटर पर ब्लड प्रेशर .ई सी जी ,हार्ट बीट्स सब मद्धिम नजर आ रहीं है \पूरे सर पर पट्टियाँ बंधी हैं ]
मम्मी     = लक्की लक्की मैं आ गयी बेटा \देख कोन आये हैं \श्री राम आये हैं \
          [तभी राम लक्ष्मन के सामने खड़े होते हैं ऑर प्रकाश पुंज में तब्दील हो जाते हैं \वार्ड में मोजूद नर्सों ऑर मरीजों को यह दृश्य दिखाई नहीं देता \प्रकाश पुंज कि किरणें लक्की में प्रवाहित होने लगती हैं \
        हं ०००[एकाएक लक्ष्मन को झटका  लगता है फिर उसका शरीर फड फडाने लगता है \]
नर्से        = डॉक्टर डॉक्टर !मीराकल [वो बाहर भागती है ]पेशंट को होश आ रहा है \
         [देखा देखि कक्ष में काफी लोग घुस जाते हैं \दिव्या का रंग पीला पड़ने लगता है ]
मम्मी === लक्की !लक्की [खुश होती माँ की आँखें भीगती हैं ]
लक्ष्मन  == म .. म म मम्मा हे र र राम [लक्ष्मन के मास्क में से आवाजें टूट टूट कर निकलती हैं फिर हाथ पैर फड  फडाने लगते हैं ]
       [फटाक ...धडाक...फिर उसके चारों ऑर लगी ड्रिप्स, मास्क हटना शुरू हो जाते हैं और लक्ष्मन उठ कर बैठने लगता है
साथ ही वो चेहरे की पट्टियाँ खोलने लगता है ]
       तभी दोनों डोक्टोर्स अंदर घुसते हैं
डॉक्टर   = स्टाप इट!अभी पट्टियाँ खुलने का समय ..
लक्ष्मन == मम्मी !किदर है तू ..मेरे कू तेरे कू देखना मांगता \
मम्मी === बच्चे रुक !मैं इधर ही तेरे पास [मम्मी उसे कलेजे से लगाती है ]
लक्ष्मन   = तुम वो राम राम बी कुछ बोली थी न १रिमेम्बेर ! जय श्री राम !
डॉक्टर    = बेटे टांके अभी कच्चे हैं \कच्ची आँखों पर सीधी  रौशनी  पड़ी तो तुम्हारी eye sight जा सकती है \
लक्ष्मन    = मैं जानता मेरी आँखों में कांच घुसेला...मैं देखा कि मैं तब नहीं देखा ...मैं समज गया म अब  सूरदास होएला ..मेरा आई sight अब खलास ...total finish ,फिर बी मैं देखेगा --मन की आँखों से --मम्मी को देखेगा \
        [सामने खड़े श्री राम के नेत्र भी सजल हो उठते हैं जबकि लक्ष्मन अपनी पट्टी उतार देता है ]
डॉक्टर    = सब बाहर निकलो lights off \पेशुंट के लिए lights हार्म फुल
       [मीरा एक कोने में दुबक जाती है [उसकी आँखों में शुक्राचार्य के शब्द गूंजने लगते हैं \बाकी सब बाहर चले जाते हैं ]
लक्ष्मन    = मेरे कू मालूम पट्टी के पीछु बी अँधेरा आगे बी अँधेरा ...अंधे के चारों तरफ अँधेरा ही अँधेरा ..मम्मी मेरे कू कुछ नहीं दीखेला \
मम्मी    = अँधेरा है बेटा ...मुझे भी कुछ देखाई नहीं दे रहा [माँ दुर  खड़ी सिसकती है ]
        तभी राम उसके समक्ष पहुँचते हैं \प्रकाश पुंज लक्ष्मन को दिखता है \
लक्ष्मन   =मम्मा ..ये गोल गोल lights क्या ..मेरे कू seven color रेनबो दीखेला ..
डॉक्टर   = डॉ० देव -लगता है आँखों के साथ साथ पेशंट का दिमाग भी हिल गया है \आपको भी रेनबो दिख रहा है ?
डॉ ० देवा =नो !सिवाय घुप्प अँधेरे के तो कुछ भी नहीं
        तभी राम उसके करीब पहुँचते हैं \
लक्ष्मन  = मम्मा !रेनबो पास आयेला है ..आप कौन जी [उधर राम लक्ष्मन को बांहों में भींच लेते हैं ]..मम्मा ये हाई वोल्टेज रेनबो मेरे को जकडे ला ..४४० वोल्ट इलेक्ट्रिसिटी ..ह र र र ००० ..मम्मा मैं काम्पेला क्यूँ हूँ ...आई ऍम शिवेरिंग ..मम्मी सम बॉडी shaking मी ..शोककिंग मी ..ओ भाई पॉवर हाउस !हू आर यू ?
श्री राम == तुंमहारा राम और तुम... मेरे लखन मेरे लखन
लक्ष्मन  =  आईला !सुभाष घई की राम लखन कौन देखेला ..कौन मेरे कानां में फ़ुस फ़ुस करेला ..हैं ०० jackie shroff !
         तभी प्रकाश पुंज की रौशनी लक्ष्मन की आँखों में घुसती है \लक्ष्मन को पुंज में ही श्री राम के दर्शन होते हैं और उसी क्षण उसकी ऑंखें नाम पड़ना शुरू हो जाती है |
        माँ दूर दुबकी सिसकियाँ भारती है
       मीरा की ऑंखें लक्ष्मन के शब्दों से ही झिल मिलाने लगती हैं \
       वो समझ जाती है

lucki Ram part 6

श्री राम ==सीते !ये हम कहाँ आ गए [राम अपने वजूद को टटोलते हैरत में देखते हैं ]
सीता जी=प्रभु !आप कलयुग में हैं १भग्वान बनकर पूजे जाते हैं यहाँ पर\[सीता जी इठलाते हुए कहती हैं ]
         [उनकी यह वाणी मंदिर में मोजूद भक्तओं  को सुनाई नहीं पड़ती जबकि बाहर छड़ी के सहारे खड़ी माता उन्हें एक हाथ के इशारे से बुलाती है \जैसे कोई बच्चा नन्हे हाथों से अपनी माँ को बुलाता है \
श्री राम == यह कौन देवी है सीते ?[प्रभु राम बाहर देखतें हैं ]
सीता जी = प्रभु !यह आपकी माता हैं \माता कौशल्या ! अहिल्या बनने के लिए बाहर खड़ी हैं \
श्री राम == असंभव !राम के होते कौशल्या अहिल्या बनेंगी --कदापि नहीं \
सीता जी = प्रभु !जाइए \व्यर्थ की बातों में समय न गवाइए..देखो !कितने मनुहार-बलिहार से आपको बुला रहीं हैं[सीता जी का स्वर  भीगता  है ]
श्री राम == अवश्य !हम चलते हैं [राम मूर्ती में से बाहर निकलते enlarge होतें हैं ]
सीता जी = रूकिये |माँ के पास जायेंगे तो राजा राम बन कर जायेंगे |
श्री राम == तात्पर्य ?[राम अचरज से अपने आपको निहारतें हैं ]
सीता जी = वस्त्र-आभूषण उतार कर जाइए |माँ के समक्ष पुत्र बन कर पहुँचिये \
श्री राम == ओह !अवश्य !आप साथ नहीं चलेंगी ?
सीता जी = नहीं मैं फिर कभी |आप जाइए |मैं door से ही आपका वार्तालाप श्रवन कर लूंगी |
श्री राम == और बीच बीच में सलाह भी deti रहिएगा ..पता नहीं माता कौशल्या क्या चाहतीं हैं ..अ अ और मुझे bhay भी लग रहा है |
सीता जी = जी ०० |
         [प्रभु राम मूर्ती से बाहर निकलते हैं ऑर रaस्ते में ही उनका रूप साधारण मनुष्य में तब्दील होता जाता है |वो कोट pant में नजर आतें हैं |वो माँ के समक्ष पहुँचते हैं और हाथ जोड़ते हैं ]
श्री राम== प्रणाम माते [राम चरण स्पर्श करते हैं ]
माजी === टाइम मिल गया \बहुत देर से दर पे आँखें लगी थी |
श्री राम = टाइम ![अचरज से ]
माँ जी == समय मिल गया आपको ?
श्री राम = ओह !टाइम अभिप्राय -समय [राम एका एक माँ की छड़ी खींचते हैं ऑर माँ के आगोश में समाते चले जातें हैं ]
श्री राम =क्षमा माते क्षमा !मुझे नहीं पता था आप इतने दिनों से मेरी प्रतीक्षा कर रहीं हैं |
माँ जी == युगों युगों से बेटा ..युगों युगों से इंतजार हो रहा है तुम्हारा ..एक एक जन को ,एक एक तन को जरूरत है आपकी |
      [प्रभु राम आलिंगन से निकलकर माँ की आँखों में झांकते हैं |फिर आँखों आँखों में ही आंसुओं की गहरी झील में खो जाते हैं ]
============
============
श्री राम = आज्ञा दीजिये माते |
माँ जी == सबसे पहले उन भक्तों का उद्धार keejiye जो तुम्हारी राह में पलकें बिछाये खड़ें हैं |
श्री राम =  तथास्तु [राम हाथ खडा  करतें हैं ऑर प्रकाश पुंज सभी भक्तों को रोशन करता चला जाता है ]
भक्तगण = जय श्री राम !जय श्री राम ..का जय घोष मंदिर में होने लगता है
श्री राम = क्या आज्ञा है माते ?
कोशल्या = लक्ष्मन को जानते हो ?
श्री राम = अवश्य |वो हमारे अनुज भ्राता हैं और ..
माँ[अधीरता से ]=..इस समय अस्पताल में अंतिम साँसें ले रहें हैं \
श्री राम = असंभव !हमारे लक्ष्मन का कलयुग में क्या काम..औष्धल्य में क्या काम \
मा        = नहीं राम नहीं !आपका लक्ष्मन कलयुग में ही है \कलयुग का ही है \
श्री राम = यह तो अति प्रस्सनता की बात है |पर क्या हुआ उन्हें ?
माँ जी == वही जो राम के बिना हर लक्ष्मन को होता है \उस युग में भी कभी गुम हो जाते थे \कभी सूर्पनखा की नाक काट देते थे \कभी मूर्छित हो जाते थे \
         [राम माँ के साथ निकलते हैं \माँ छड़ी के बिना चलने लगती है ]
श्री राम == अभिप्राय-- हमारा लक्ष्मन मूर्छा अवस्था में है |अचेतन अवस्था में है\ औषधालय में है !कदापि नहीं !आपने हमें इस समाचार से वंचित रखा !आपने किंचित मात्र भी ...
माँ जी == राम, राम, बेटा ध्यान  रहे  रिमोट का ज़माना है \अगर आप बार बार किंचित ,वंचित ,कदा पि  करते रहेंगे तो किसी को समझ न आएगा -और फिर भक्क से हमारा चैनल पहले टी.वी से गायब होगा ..ऑर फिर मेमोरी से उड़ा दिया जायेगा \
श्री राम == चैनल ?रिमोट ?अभिप्राय ?
माँ जी ==  बेटा ,इन शब्दों की हिंदी आजतक किसी को नहीं पता सो आपसे निवेदन है कि सरल भाषा का ही प्रयोग करें \नहीं तो जब आपकी मुलाकात हयेला ,करेला , से होगी न ..[माँ मुंह में ही बुड बुड करती है ]तो ऑर दिक्कत हो जाणी है ,आपने   जब वुई मेट कि जगह कहना है 'क्यूँ वुई मेट 'समझे ?
श्री राम = अवश्य |समझ गया माते |
माँ जी == ओ .के .
श्री राम = अ अ ओ के |और क्या क्या चाहतीं हैं आप ?
माँ जी == चाहने से कभी कुछ मिला है किसीको ..जो मुझे मिल जायेगा
श्री राम = आप मेरा इम्तिहान ले रहीं हैं \
माँ जी == मेरी इतनी मजाल  \
श्री राम = हुम्म!तो आप हमें चुनोती दे रहीं हैं ?
माँ जी == मेरी इतनी हिम्मत कि श्री राम को चुंनोती दूं \
श्री राम = तो फिर कहिये न \
माँ जी == बिनती है --पूरी करेंगे \
श्री राम = अवश ..
माँ जी == सोच समझ कर हाँ कीजियेगा ..कहीं ऐसा न हो ,आप माता कौशल्या के शब्द-जाल में फंस जाएँ \जैसे माता ककयी के शब्द जाल में जा फंसे  थे\
श्री  राम = वो भी माता थी \आप भी माता हैं \वो पुत्र ही क्या जो माता का कहा poora न करे\माँ का फरमान , पुत्र का अरमान  |

Luckki Ram Part 7

  माँ जी == आप उर्दू अछी बोलतें हैं फरमान -अरमान \और भगवान् होकर भी "मैं" बोलतें हैं \हम बोला काजिये \आखिर आप राम हैं \भगवान् राम \
श्री राम == बहुत मीठी जबान है उर्दू ..बोलने में अच्छा लगता है .रही बात "मैं " की--तो "मैं" तो रहेगी ही |"हम" तो कभी बन ही न पाए "हम "|"हम"तो हिन्दू मुस्लिम के एक होने से बनेंगे |"ही एंड मी " जब एक होंगे,तभी बनेंगे"हम"
|अब कहिये ?
माजी === आप घर घर में फेरा लगायेंगे \घर घर में समायेंगे \
श्री राम = क्या ऐसा मुमकिन है ?[राम रहस्यमयी मुद्रा में मुस्कुरातें हैं ]
कोशल्या = क्यों मुमकिन नहीं - आप ऐसा करेंगे तो मेरा यकीन है कि घर घर से पाप घटेगा \अभिशाप हटेगा \दुःख दर्द कटेगा \
श्री राम = माते क्या आप धरती पर पूरी तरह दिन की कल्पना कर सकती हैं \मतलब रात हो ही न \
माँ जी =  नहीं !ऐसा हो ही नहीं सकता \
श्री राम = आप चाहती हैं धरती पर कोई भी भूखा न रहे
माँ जी == चाहती तो हूँ --पर ऐसा भी नहीं हो सकता \
श्री राम =  इसी तरह दुःख के बिना सुख भी अधूरा है \पाप के बिना पुण्य बेकार है \दुःख नहीं होगा तो सुख का मजा किसे आएगा \पाप नहीं होगा तो पुण्य का मोल किसे समझ आएगा \माता आप चाहती हैं की शेर भी हिरन हो जाये और हिरन भी हिरन ही रहे \ऐसा न तो कभी सतयुग में हुआ और न ही उसके बाद के किसी युग में हुआ \
माँ जी =  हुम्म [कोशल्या स्वीकृति में गर्दन हिलाती है ]
श्री राम = सतयुग में भी श्री रावण को विभीषण ने कितना समझाया पर क्या उन्होंने अपनी हठ छोड़ी|
माँ जी =   कहते तो आप ठीक हैं \
श्री राम = माते | कोई भूखा न रहेगा तो कर्म ही क्यों करेगा \कोई मजदूर ही न रहेगा तो भवन निर्माण कौन करेगा| वैसे मैं आपका अभिप्राय समझ रहा हूँ \आप धरती से दुराचार ,अत्याचार ,भ्रष्टाचार जैसे कई व्याधियां (बीमारियाँ )door करना चाहतीं हैं \जो धीरे धीरे ही होंगी \किसी उपाय से ही होंगी \रही बात मेरे घर घर में फेरा लगाने का -तो इससे कुछ नहीं होने वाला \
माँ जी == कमाल है !राम बोलेंगे तो क्या लोग नहीं मानेंगे \
श्री राम = माते !आप चाहती हैं राम घर घर जाकर सत्संग करें =अनुनय -विनय करें...
माँ जी == मैं ऐसा भी नहीं चाहती \
श्री राम = ...तो मैं आप से वादा करता हूँ जिस घर में सब सच्चे होंगे \सब निष्कपट ,चरित्रवान और मर्यादा पुरषोतम होंगे \मैं उस घर में अवश्य जाऊँगा \
माँ जी =  ऐसा तो कोई घर ही नहीं मिलना इस कलयुग में
     [  दोनों हॉस्पिटल के नजदीक पहुँच जाते हैं ]
श्री राम =  अगर मैं पाप और दुष्कर्म से भरे घर में जाऊँगा ,तो क्या उस घर  के लोगों में परिवर्तन आ जायेगा \
माँ जी == मुश्किल है -लोगों को ऐसी आदतें पड़ गई हैं कि पैसा ही परमेश्वर नजर आता है \चरित्र ,नैतिकता तो गुजरे जमाने कि बात लगती है -हुम्म लगता है इस समस्या का कोई हल है ही नहीं \
श्री राम ==[ मुस्कराते हुए ]हल तो है माते
           [माँ जी चोँक कर श्री राम को देखती हैं ]
श्री राम =  हाँ माते! हल है|और उसिलिये ही आपने हमें मंदिर से बाहर बुलवाया है |ब्रह्मलोक तक ढोल बजाया है|
मम्मी == सच !हल है समस्या का -क्या
श्री राम = लक्ष्मन |हमारा लक्ष्मन |
मम्मी == लक्ष्मन !!वो खायेला,पियेला..वव  वो क्या करेगा ..उसे तो पढाते पढाते टीचर अनपढ़ हो गए .पर उसकी हमेरी तुमेरी नहीं सुधरी ..
श्री राम== आप चलिए तो -सतयुग के राम लक्ष्मन तो कुछ कर न पाए |शायद सतयुग के रांम ऑर कलयुग के लक्ष्मन ही मिलकर कुछ कर दिखाएँ |
मम्मी ==  सच !यानि उम्मीद अभी बाकी है \
श्री राम == उमीद्पर ही दुनिया है माते
मम्मी ==  पर ऐसा होगा कैसे ?
श्री राम == साम दाम दंड भेद ! 

13.10.09

LuckiRam-part 5

ब्रह्म ===== असत्य |अधर्म   का नाश अगर सतयुग में हो चुका होता तो आप कभी दूसरी बार भगवन क्रिशन का अवतार नहीं लेते
विष्णु ==== त त तब तो हमने पाप का नाश करना था --पापी कंस को मारकर \
ब्रह्म[हंसते हैं]= आहा!रावण को मारकर ,अधर्म का नाश हो गया /कंस को मारकर पाप का नाश हो गया |आप नहीं जानते यह कलयुग है कलयुग -पाप ऑर अधर्म तो यहाँ कदम कदम पर हैं ही |घात-प्रतिघात ,इर्ष्या -द्वेष ,छल -कपट भी हर घर में फल फूल रहें हैं |हर पेड़ की डाल पर पनप रहें हैं ..डाली डाली शूल खिला है ..चड्डी पहनकर पाप चला है
विष्णु ==== आप तो पोथा बांचने  बैठ गए |इतनी लम्बी कथा पढेंगे तो कौशल्या माता अहिल्या बन जाएँगी |महेश जी आप कुछ कहें |
महेश जी=== विष्णु देव हम क्या कहें |हम तो वैसे ही तहस -नहस में विश्वास करते हैं |कहो तो तांडव शुरू करें (तांडव की आरंभिक मुद्रा बनाते हुए )
विष्णु ===== बस !खुल गई आप की तीसरी आँख |जरा सी विपदा आई नहीं कि तांडव शुरू |जरा सी विपदा जब तक विध्वंस का रूप न लेले ,आपको स्वाद नहीं आता |
महेशजी==== अब हम क्या करें |हमारा मिजाज ही कुछ ऐसा है |वैसे यह विपदा कोन है ?विध्वंस इनका कोन लगता है ?
विष्णु ===== विपदा माता कौशल्या है ऑर उनके आते ही विध्वंस यहाँ होगा -हमारे ब्रह्माण्ड में
ब्रह्म ====== जी
महेशजी === असंभव ..हम अभी तांडव शुरू करते हैं |न विपदा आएगी ,न ही उनके आने पर विध्वंस  आएगा |
ब्रह्म ====== तब विनाश आएगा |प्रलय आएगी \
महेशजी === अब यह विनाश-प्रलय कौन हैं ..सभी साथ आयेंगे या अलग अलग |
विष्णु ===== आगे पीछे ही आएंगे |
महेश जी === फिर तो भिड़ा जा सकता है |इकठे आते तो दिक्कत होती |तांडव हथियार कांम करता या नहीं --पता नहीं
विष्णु ===== यह सब आपके तांडव के बाद ही आयेंगे |इसलिए आप अब चुप ही रहेंगे |खामोश |
ब्रह्म(विचलित)=विष्णु देव कुछ कीजिये |नीचे भगवान् राम चिंतित नजर आ रहें हैं |देखो !कितनी भीड़ नजर आ रही है | सब माता कौशल्या के साथ हैं |राम अकेले हैं |
विष्णु ====== पर हम करें क्या ?
ब्रह्म (अधीर )== आप को एक बार फिर मानव रूप धारण करना होगा |फिर भगवन बनकर धरती पर जाना होगा |
विष्णु ====== असंभव !कदापि नहीं |
ब्रह्म ======= क्यों ?
विष्णु ====== समस्या विकत है |
ब्रह्म ======= अगर आप किसी समस्या का समाधान नहीं ,तो आप खुद ही एक समस्या  है |
विष्णु ====== गुरुवर!आप समझते क्यों नहीं |कलयुग वालों का समाधान हम सतयुग वालों के पास नहीं है ..सुना नहीं ,अभी तो घात प्रतिघात ,इर्ष्या द्वेष ...
ब्रह्म ======== सुना क्या वो तो कहा ही हम्ने  था|
विष्णु ======= ...वगरह वगरह --इतनी तो बीमारियाँ फैल चुकी हैं |हमसे तो पाप ऑर अधर्म ही न संभले कभी |एक रावण क्या मार दिया हमने ,स्वयं को भगवान् समझ लिया |एक कंस क्या मारा कि किशन कन्हैया बन गए |अब --वहां तो घर घर में रावण है ,कंस है ..
ब्रह्म ======== महिषासुर है \जरासंध भी है और -दुर्योधन तो कुकुरमुत्ते की तरह हर गली ,कोने में पड़ा है और ...
विष्णु ======= वगरह वगेरह  भी हैं |हम जानते हैं ..जानते हैं ..आप कृपा कर हमें ऑर न डराएँ ..बस इतना जान ले किसतयुग का सिक्का अब कलयुग में नहीं चल सकता |
ब्रह्म ========= तो फिर करें क्या \हाथ पर हाथ धरके बैठें रहें |
महेशजी ====== मेरा ख्याल है हमें माता विपदा ....
विष्णु ======== माता कौशल्या !कौशल्या०००
महेश जी ====== जी जी वही वही |हमें माता वि ..कौशल्या  का यहीं इंतजार करना चाहिए |चिंता की इस बेला में शायद माता ही मुक्ति का कोई मार्ग सुझाएँ ..
विष्णु ======== वो यहाँ थोडी न आ रहीं हैं |अभी तो उनकी आकाशवाणी ही आई है |
महेशजी ======तो फिर!
ब्रह्म ========= मेरी मनो तो सब कुछ राम पर ही छोड़ दो |राम की बातें राम ही जाने |
विष्णु =======  हम भी वही सोच रहें हैं|
महेशजी ====== मैं भी |आओ चोसर खेलें
विष्णु ======== खामोश
महेशजी ====== मैं तो वैसे ही कम बोलता हूँ |न के बराबर बोलता हूँ |फिर भी जब बोलता हूँ तो ...खा ००मो ०० श श श
विष्णु ======== अब आप खामोश रह कर ही बोलेंगे |
ब्रह्म =========  तुम फिर बहस बाजी में पड़ गए \राम को होशियार करो --उन्हें कहो कि कौशल्या जी से मिलें \
विष्णु =======   पर कैसे ?
ब्रह्म =========  अरे !अपने प्राण राम कि मूर्ती में फूंको \मूर्ती बोल पड़ेगी |
विष्णु =======   और माता सीते--वो भी तो साथ खड़ी हैं |राम बोलें और सीता ना बोलीं तो राम जी से तो झगडा करेंगी |
महेशजी ======  जब सीते जी बोलेंगी ही नहीं तो झगडा कहाँ से करेंगी |
ब्रह्म =========  तो सीता जी के लिए आप लक्ष्मी जी कि मदद लें |लक्ष्मी जी के प्राण सीते जी में फूँके ...
महेशजी ======  ऑर आप दोनों बिना प्राण के पुतले बन कर खड़े हो जाएँ |
विष्णु ========  चट[चुटकी बजाते हुए ]..यह ठीक रहेगा ..हम अभी आते हैं |
            [विष्णुजी लक्ष्मीजी  को मनाने निकाल पड़ते हैं ]
महेशजी ======  आइये भगवन !भांग -धतूरा खाते हैं ,थोडी थोडी ताड़ी भी ..
ब्रह्म =========  खामोश ००
महेशजी======लगता है हमारी तीसरी आँख का डर नहीं रहा अब ...तांडव करना ही पड़ेगा |
            तभी आकाश लोक से दो प्रकाश पुंज आत्माओं के रूप में धरती कि तरफ निकलते हैं ऑर मंदिर में खड़ी राम सीता की मूर्ती में प्रविष्ट होतें हैं |
           पूरा मंदिर रोशन हो उठता है  |धरती डोलने लगती है |घड़ियाल बज उठते हैं
           बाहर खड़ी मम्मी की गर्दन मूर्ती की तरफ घूमती है |
           भक्तों की  भीड़ इस अद्भुत दृश्य को देख चकाचोंध हो जाती है
           तभी राम सीता की मूर्तियों में हलचल सी होती है

LUCKI RAM Part 4

माँ जी =बेटा आ रहा है ..कोई नहीं कोई नहीं ..अभी देर है ...मैं खड़ी हूँ ,खड़ी हूँ बेटा ..take your own time
भक्त ==माँ जी [वो जेब से ५०० की गड्डी निकालता है ]मेरे साथ चलिए \मैं भी आपका बेटा ही हूँ \
माजी =बेटा पैसा तो बहुत है \बेटे भी बहुत हैं \पैसे वाले बेटे भी बहुत हैं ..पर हर मर्ज़ की पैसा दवा नहीं
युवक =माँ जी आज की दुनिया में पैसा संकट मोचन है \दुःख भंजन है [पैसे देता वो माँ को कहता है ]
माँ जी ==बेटा[ नोटों की गड्डी देखते हुए ]इसका काम तो खरीदना  है ..फिर भी हर कोई इसके हाथों बिका है \ बिके जा रहा है \
युवक =माँ जी आप लक्ष्मी का अपमान कर रहीं हैं ..पैसा सब कुछ कर सकता है \
माँ जी =बेटा तेरे पास बहुत पैसा है ?[गड्डी लोटाते हुए ]
युवक = सब आपकी ही मेहर है ..आपकी दया से सब कुछ है \
माँ जी =फिर तो कोई दुःख भी न होगा ?
युवक = व व व वो वो ००
माँ जी =तेरी आवाज़ ही बता रही है कि तेरे दुःख में तेरा पैसा काम न आया \आया तो बस राम का नाम ही काम आया \
युवक = माँ जी /इश्वर आस्था का प्रतीक है \हमारी आत्मा का साबुन है \इश्वर का नाम लेकर हम अपने कुकर्मों को धो सकते हैं
माँ जी = चुप चुप \ज्यादा बातें मत कर \भगवान हमारे अंदर है हमारे अंदर मंदिर है ..वो अभी आयेंगे ..उस मंदिर से निकलकर इस मंदिर में आयेंगे ..हमारे रोम रोम में समायेंगे ..तेरे तन में राम मान में राम.. रोम रोम में रामरे..
युवक = माँ जी कब तक ये किताबी बातें करती रहेंगी \
माँ जी = बेटे मेरे [उसकी ठुड्डी पुचकारते हुए ]मैं तो चार कदम चल भी नहीं सकती \फिर भी इतने दिनों से यहाँ खड़ी हूँ -क्यों
युवक = वववो वो ००
माँ जी = मुझे तो यह भी नहीं पता मैं यहाँ पहुंची कैसे \किसने पहुँचाया -फिर भी मैं पहुंची \क्यों ?
अयुवक = अ अ अब इस बारे में मैं क्या बताऊँ \
माँ जी =शुगर मुझे है ,ब्लड preessure मुझे है ..हार्ट पे शुंट मैं ..जोड़ों का दर्द मुझे ..ऑर भी सो बीमारियाँ \मडिकल साइंस वाले मुझे बीमारियों का encyclooedia कहते हैं \फिर भी मैं यहाँ खड़ी हूँ -क्यों ?
युवक = अब मैं क्या बताऊँ [पसीना पोंछते हुए ]
माँ जी =चल मेरी छोड़ -अपनी बता \तेरी गाड़ी बाहर रोड पर खड़ी है ..तू पिछले ७२ घंटों से बजना खाए पिए यहाँ पड़ा है ..ततैये कि तरह  मेरे आगे पीछे भिन भिना रहा है ..क्या देखने के लिए खडा है ..ये बुडिया मरती कब है ,गिरती कब है
युवक ==नो नो \सच बात तो यह है कि आपको देखकर पता नहीं कहाँ से हिम्मत आ गई \सच पूछिए तो न ही भूख का पता पड़ा ,न ही प्यास को मालूम चला \
माँ जी =क्यों ?
युवक == कोई तो ताकत है  जिसकी बदौलत आप खड़ी है / कोई तो शक्ति है जिसकी बदौलत आप अडी है क्योंकि...
माँ जी =वही तो हस्ती है जो मंदिर में खड़ी है \मूर्ती बन कर जडी है \पर कभी तो ...आज नहीं तो कल   कल नहीं तो अगले
 साल ..साल नहीं तो अगले काल ..कभी तो वो पिघलेगा \माँ कि ममता के आँचल में कभी तो आकर घुलेगा \
सभीभक्त=माँ माँ !हम आपके साथ हैं \
       तीन चार लोग ऑर आतें हैं ऑर भक्तों कि भीड़ में जुड़ जाते हैं \
      अगले दो दिनों में भीड़ ऑर बाद जाती है \
       पंडित शुक्राचार्य के मुताबिक ३१ भक्तों की भीड़ जरूरी थी \
       ऑर दो दिन बाद ---
===============
===============
माँ जी = सुनो! उनसे पूछ कर आना ,अहिल्या को जानते हैं ?
युवक ==अहिल्या !
माँ जी = जाओ पूछो \देखना जरूर चौक  जायेंगे \फिर दोडे दोडे आयेंगे \
         [एक भक्त भागता हुआ मंदिर में जाता है \दंडवत होकर प्रभु से पूछता है ...
भक्त == भगवन!व व वो पूछ रहीं हैं -क क क्या आप अहिल्या को जानते हैं ?
श्री राम=भगवान् कोई जवाब नहीं देते \
         तभी दूसरा भक्त आकर दंडवत होकर पूछता है ..
भक्त २ =प प प्रभु !वो जानना चाहतीं हैं ,आप ही हैं न वो ,जिन्होंने अहिल्या में प्राण फूंके थे !उ उ उसे पत्थर की शिला से स्त्री बनाया था ?
श्री राम=प्रभु राम फिर कोई जवाब नहीं देते \
भक्त ३= व व वो कह रहीं हैं अ अ अगर कोशल्या अहिल्या बन कर दिखाए तो ,फिर तो पहचान लेंगे न आप ?
          टन..टन ..मंदिर में घंटा बज उठता है \मूर्ती डोल उठती है\
भक्त ४= प्रभु !कुछ कीजिये ..वो देखिये ..कौशल्या बनी शिला ..कौशल्या बनी अहिल्या १
        कड़ाक...badamm ..गर्जना ..बिजली चमकती है ऑर "कौशल्या बनी अहिल्या" की प्रतिध्वनि ध्वनित होती आकाश लोक में पहुँचती है ..
       मंदिर में चारों तरफ घंटे -घड़ियाल स्वतः ही बज उठते हैं
       भक्तगण हर्षनाद कर उठते हैं \
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=============
          आकाश लोक में ब्रह्म विष्णु महेश चिंतित नजर आते हैं \
विष्णु (अचंभित )= ब्रह्मदेव !मृत्यु लोक डोल क्यों रहा है ?लगता है आपकी सृष्टि पर घोर विपदा आने वाली है \
ब्रह्म                 =  विष्णुदेव ..वो घोर विपदा आपके राम के ऊपर आ रही है \माता कौशल्या अहिल्या बनने जा रही है \
विष्णु               = नहीं ०० !राम ऑर कौशल्या अब कहाँ ..सतयुग में राम का चोला तो हमने ही धारण किया था ताकि अधर्म का नाश कर सकें \नाम के तो लाखों राम हैं जहाँ में .
ब्रह्म                  =   क्या अधर्म का नाश हो चूका था?
विष्णु               = निः संदेह |

LUCKI RAM Part 3

मीरा == तुम्हे लगता है ज्योतिषी की बातों में कोई सचाई है ...लक्की बचो !![एकाएक मीरा चीत्कार करती है ]
      [लक्ष्मन की गाड़ी एकाएक बाएं लेन से हाई वे की तरफ मुडती है कि आगे जाता ट्रक अपना लेन बदलता है \ट्रक के पीछे सरिये लदे हैं जो पीछे से काफी बाहर निकल रहें हैं \लक्ष्मन काफी हद गाड़ी कण्ट्रोल करने की कोशिश करता है मगर ...
            नो ०० !छनाक...विंड स्क्रीन टूट जाती है ..शीशे के टुकड़े उसकी आँखों में जा घुसते हैं \दो तीन सरिये भी बॉडी में घुसते हैं
कुछ सरिये छत में जा गड़ते हैं \मीरा को खरोंच भी नहीं आती क्योंकि दूसरी तरफ के सरिये पैसेंजर डोर को बाहर ही बाहर से छूते चले जाते हैं \गाड़ी का अगला बोनेट ट्रक के नीचे जा घुसता है \
मीरा ==हेल्प !हेल्प !...[मीरा भरे गले से चीत्कार करती है \फिर कैट्स [एंबुलेंस ] का नंबर मिलाती है ]
मीरा ==ओ गोड !ज्योतिषी ने ठीक कहा था !पर उसने तो कहा था लक्ष्मन की हत्या में करूंगी ..पर ये तो एक्सीडेंट ..कहीं ऐसा तो नहीं मेरे हाथों फिर कभी इसकी हत्या हो ..नहीं ००० !
              [दस मिनट बाद लक्ष्मन हॉस्पिटल ले जाया जा रहा होता है \
          हॉस्पिटल में लक्ष्मन को amaर gency में ले जाया जाता है \मीरा फोन पर हरीदार निकली मम्मी को खबर करती है \
लक्ष्मन के भाई अनुज ऑर बहन दिव्या को खबर करती है \
         आधे घंटे बाद ----
डॉक्टर =आई ऍम सॉरी मम !बहुत दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि पेशट की आँखें टोटल डैमेज हो गयी हैं \एक सरिया दिल को छीलता गुजरा है \खून काफी बह गया है \बचना मुश्किल है ऑर देखना-- नामुमकिन \भगवान ही बचाए तो बचाए \
मीरा ==नो ०० गोड !तुम इतने पत्थर नहीं हो सकते \
        फिर तमाम रिश्तेदार पहुँचने लगते हैं \लक्ष्मन का भाई अनुज पहुँचता है \बहन दिव्या पहुँचती है \
        कुछ देर बाद लक्ष्मन कोमा में चला जाता है \उसकी सांसें गुम होने लगती हैं \डोक्टोर्स उसे वेंतिलटर पर छोड़ देते हैं \
        दवा बेकार है दुआ जरूरी है \
        दो घंटे  तक मम्मी वहां नहीं पहुँचती \
        दो दिन तक भी मम्मी वहां नहीं पहुँचती \
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============
      [आकाश में एकाएक बिजली कड़कती है \हाईवे पर एक छोटा सा मंदिर रोशन नजर आता है \उसी रौशनी में ही एक बूडी औरत छड़ी के सहआरे खड़ी नजर आती है \उसके गिर्द चार छह श्रद्धालू डेरा लगाए बैठें हैं \बोदी ओरत बेहद रहस्यमयी आँखों से मंदिर में खड़ी राम ऑर सीता की मूर्ती देख रही है यद्यपि इतने अँधेरे में उसे नजर कुछ नहीं आता ,पर रह रह कर कड़कती
बिजली के दोरान ही वो राम सीता की झलक पा लेती है ऑर हलके से मुस्कराकर चेहरा फेर लेती है \कहती कुछ नहीं \
      तभी एक भक्त उसके पास पहुँचता है \
भक्त ==माँ जी ,पिछले तीन दिनों से आप इस छड़ी के सहारे भगवान राम के सामने खड़ी हैं -आखिर बात क्या है ?
माँ जी =हं हं ०० वो सब जानते हैं \आप उन्हें जानते हैं ?
भक्त ==उन्हें कौन नहीं जानता \वो भगवान राम हैं \उन्हें सब जानते हैं
माँ जी =उन्हें सब जानते हैं तो वो भी सब जानते हैं \देखना --वो एक न एक दिन जरूर बाहर आयेंगे \
भक्त ==बाहर आयेंगे !मंदिर से निकलकर !!
भक्त २ =तब तक आप खड़ी रहेंगी \तीन दिन हो गए \कितने दिन खड़ी रहेंगी आप ?
        सभी भक्त उठकर माँ जी को घेर लेते हैं ऑर हैरत भरी नजरों से निहारते हैं
भक्त ३=अम्मा कितने दिन खड़ी हो लेगी तू ?
माँ जी = मास दो मास..साल दो साल ..युग दो युग ..युगों युगों तक \
भक्त ==अम्मा तू पागल है \तू मर जावेगी !
माँ जी =यही तो देखना है बेटा कब तक अपनी माँ को खडा रखता है \
भक्त १२=बेटा =कोन बेटा !?
माँ जी =वो राम ..वो मेरा बेटा है\
भक्त ==ऑर आप ?
माँ जी =मैं-मैं उसकी माँ -कौशल्या खन्ना
       [सब अलग अलग बोलते हैं ..लगता है बुडिया बौरा गई है ..शायद इस कौशल्या का कोई बेटा नहीं तभी राम को अपना बेटा मान बैठी है ..चलो भाई घर चलें खामखा इस माता के चकर में यहीं पड़े रहे ..न प्रॉब्लम बताती है न ही कोई मदद लेती है
दो तीन सुर =माँ जी माजी  कुछ तो बोलो शायद हम आपकी कुछ मदद कर सकें ?
       [तभी बिजली कड़कती है \माँ की आँखों में हॉस्पिटल का दृश्य नाचता है जहाँ लक्ष्मन कोमा में पड़ा है \उसकी आँखों में बम विस्फोट के स्प्लिंतेर्स(टुकड़े ) घुसे हैं \आँखें पूरी तरह अपनी रौशनी खो बैठी हैं \डॉक्टरों ने जवाब दे दिया है \वो एक्सीडेंट को बम विस्फोट समझती है \
माँ जी ==हं हं [माँ रहस्यमयि हंसी हंसती पुनः राम की तरफ देखती है ]

7.10.09

LuckiRam-part 2

 [लक्ष्मन मीरा को लेकर अपनी मारुती ८०० में बैठता है ऑर दिल्ली के लिए निकलता है ]
                 [दोनों  गाड़ी  में बैठे हैं |लक्ष्मन ड्राइव कर रहा है |दोनों की आँखों में आंसूओ की झील नजर आ रही है |]
ट्रिन ट्रिन...[तभी लक्ष्मन का मोबाइल बजता है |उसकी मदर की कॉल आई होती है ]
लक्ष्मन==मम्मी मम्मी [वो कॉल रस्सीव करता है ]किदर है तुम ?
मम्मी ==सुन !वो न मुझे देख रहें हैं |अभी अभी बाहर गए हैं|
लक्ष्मन ==क कोन देखा तुमेरे को |किदर को निकला वो मेन ?
मम्मी===वो जो सामने हैं न फोटू वाले |
लक्ष्मन==मम्मी मम्मी वो साईं बाबा जी का कलेंडर है |तुमेरे को लगता वो तुमेरे को देखेला है ,वो अखा दुनिया को देखेला है
             वो कहीं नहीं जाते |कलेंडर में ही रहते हैं|
मम्मी == हट !झूठ बोलता है /वो मैं अभी अभी बाहर निकली वो मेरे मेरे पीछे पीछे आये /वो तेरे पापा जी हैं ...
लक्ष्मन==ओ गोड !क्या करूं इस मॉम का /पापा की मो़त के बाद पगला गई है /कभी साईं बाबा जी को पापा बोलती है ...कबी
             बेटी को बहु बोलती ..बैठे बैठे गायब हो जाती ..ढूँढो तो पता चलता एक कि० मी ० दूर हलवाई के पास बैठी..कबी वो
             लोगां इसको घर छोड़ने आ रहे होते ,कबी ये किसीके साथ जा रयेली होती ..लगता है सारी हिस्ट्री सारी मिस्टरी मेरे
             ही घर में घुसेली /
मम्मी ==क्या बुड बुड कर रहा है ..सुनाई नहीं दे रहा
लक्ष्मन==तुम अब किदर मम्मी ?
मम्मी ==मैं ऑटो में ...आ रही हूँ ..तेरे पास
लक्ष्मन==ऑटो में !..दिल्ली टू हरिद्वाए !!..साथ कोन तुमेरे ?
मम्मी ==ड्राईवर है /ऑर तेरे पापा जी /
लक्ष्मन==पापा जी !यू मीन साईं बाबा जी !!..वो किदर ?
मम्मी ==ऑटो के पीछे हैं ..साइकिल पर
लक्ष्मन==ओ मम्मा ..तुम फोन जरा ड्राईवर को दो /
मम्मी ==वो ऑटो कैसे चलाएगा ..
[मीरा की आँखें इस वार्तालाप पर भ्हीग जाती हैं लक्ष्मन भी इधर उधर सर झटकता है ]
मम्मी ==...पता है अभी ऑटो वाले ने क्या किया ..इसने न मेरी पीठ के पीछे से मेरी हड्डी निकाल ली ऑर टयेर [व्हील ]में
              लगा ली ...मेरी हड्डी नहीं है अब ,मैं हिल भी नहीं पा रही ..
लक्ष्मन==उसने डिग्गी में से 'पाना ' निकाला होएंगा ऑर टयेर  बदला होएंगा ,तुमने हड्डी गायब समझ ली /तुम फोन जरा
              ड्राईवर को दो ,वो तुमेरे को घर छोडेगा ऑर मैं आ रहा हूँ बस ..ये देख, घर के बाहर ही खडेला हूँ /
मम्मी ==झूठ  बोलता हैं माँ से ..मैं फोन काटली/मैं हरिद्वार आयेली /आयेला आयेला बहुत करता न तू /पर आता कब?
लक्ष्मन==ओ गोड गोड ![लक्ष्मन भीगी आँखों से अपना माथा पीटता है ]
              [लक्ष्मन फोन ऑफ करके डशबोर्ड पर फेंकता है ]
मीरा ==लक्ष्मन इस सबके पीछे वजह क्या है ?
लक्ष्मन==मीरा घर टूटेला न...तो ऐसा ही होएला /सब तिनका तिनका बिखरेला है /हर घर की अयोध्या लंका  बनेला है /
मीरा ==इसके पीछे भी तो कहानी होगी कोई ?
लक्ष्मन==घर घर की यही कहानी ...jealousy,selfishness.greed,complexes ,differences...कोई घर छोड़ के जायेला ..कोई
            पग्लायेला ...कोई दुनिया छोड़ कर जायेला ...[लक्ष्मन मीरा की भीगी आँखों  में झांकता है ]...ऑर कोई सात जन्मों की दुश्मन से दिल लगाएला है /

20.2.09

By-Bye TaTa/New Novel/Theme/Orders/Payments/Delivery

Ratangir Tata meets with the detective Arjun Nagpal.He offfers him two cheques,one worth Rs.25000 and another of Rs.2,50,000.He also invites him to attend his marriage anniversary party.Arjun questions about the bothoffers.Ratan gir replies that someone is theatening him to do a murder in his party thatswhy he has given him 25000 cheque.Arjun consider that amount as his fees amount.He asks about the second cheque.Ratangir smiles suspiciously and reply with the confidence-"Mr. Arjun 25000 is the amount to prevent the murder in my party and 2,50,000 is the amount to catch the murderer redhanded"
Arjun becomes suspicious about his offers and asks "who will do the murder?"
"Me"replied Ratangir.

"what-you mean to say crime will be committed by you and either I have to prevent this murder or grab you redhanded?

"Exactly"Ratangir smiles again-" Primarily stop this murder, secondly drag me to the court and convict me u/s 302:to be hanged till death."
Arjun gets angry and challenge him to drag inthe court.If not, he would kill that bastard.
Ratangir scares and demands his cheque back but Arjun refused.
Ratangir goes to the police station and complained against him.
Inspector Dev Singh calls Arjun to settle this matter.
After one hour Arjun and Dev are trapped by Anti-corruption bureu with the wittness of Ratangir Tata.They both felt cheated and treated like a slum dogs.
Then the series of some mishappenings starts and Arjun got killed...... Naina, Arjun's assitant,comes into the action......and lots of actionpacked,suspense created sequences take place,by which Arjun-Naina falls in love......Dev hates Arjun......Ratangir himself become a mystery......His wife Mrs.Ratnagir,who was supposed to be killed in the party,by his husband, begins a new history.At last, she buried herself into a magical graveyard.
NOTE: This is the first novel of ARJUN,NAINA,DEV (AND)series which is 6 novels prior to KAALII.In these 6 novels, A,N,D bound theirselves to each other with sacrificial and emotional bondings.They dont have any blood relations but humanity,love,friendship and patriotism are their best relatives.
I assure you that scenes and sequences among them will let you laugh and cry simultaneously.

10.2.09

The Castles of Otranto

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